वो जो न देखे नूर-ए-खुदा इंसा में।
Saturday, September 05, 2015
Wednesday, June 24, 2015
मेरा एक और उत्तर
कुमार विश्वास ने लिखा-
"चराग कौन जला कर गया है चौखट पर, मै अपने घर में कोई और सा चमकता हूँ....!"
तो मेरा उत्तर ये है-
बंद कमरे में शायद सूरज भी न दिखे, चौखट पे रक्खे दिये से घर का पता तो चले।
"चराग कौन जला कर गया है चौखट पर, मै अपने घर में कोई और सा चमकता हूँ....!"
तो मेरा उत्तर ये है-
बंद कमरे में शायद सूरज भी न दिखे, चौखट पे रक्खे दिये से घर का पता तो चले।
Saturday, June 06, 2015
एक और सुनिये
कुछ आदतें ख़राब ही अच्छी लगते हैं,
पुराने तो सिर्फ शराब ही अच्छी लगते हैं।
मुहब्बत के बारे में अब क्या कहूँ दोस्तों,
कुछ चेहरे ताहूर-ए-हिजाब ही अच्छे लगते हैं।
पुराने तो सिर्फ शराब ही अच्छी लगते हैं।
मुहब्बत के बारे में अब क्या कहूँ दोस्तों,
कुछ चेहरे ताहूर-ए-हिजाब ही अच्छे लगते हैं।
Thursday, May 21, 2015
एक और सुनिये
हमें अपनों से नफ़रत है, बेगाने बस बदनाम होते हैं।
लिख लूँ मैं लाख़ शेर फिर भी दर्द मेरे गुमनाम रोते हैं।
लिख लूँ मैं लाख़ शेर फिर भी दर्द मेरे गुमनाम रोते हैं।
Friday, March 20, 2015
एक और शेर का मेरा जवाब
एक कवियत्री हरजिंदर कौर को कुमार विश्वास ने re-tweet किया:
पलकें बंद हुई तो जैसे धरती के उन्माद सो गये,
पलकें अगर उठी तो जैसे बिन बोले संवाद हो गये
और मेरा जवाब उनके लिए:
पलकों को झरोखों सा न इस्तेमाल कीजिए,
दिल की कहानी को जुबां से बयां कीजिए!!
पलकें बंद हुई तो जैसे धरती के उन्माद सो गये,
पलकें अगर उठी तो जैसे बिन बोले संवाद हो गये
और मेरा जवाब उनके लिए:
पलकों को झरोखों सा न इस्तेमाल कीजिए,
दिल की कहानी को जुबां से बयां कीजिए!!
Thursday, March 19, 2015
On Indian Cricket Teams Semi final entry
सात किया है नौ कर दे, अपने कप को लॉक कर दे!!
Posted by
Ashish
at
3:20 PM
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Labels: Cricket
Monday, February 02, 2015
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