Wednesday, June 24, 2015

मेरा एक और उत्तर

कुमार विश्वास ने लिखा-
"चराग कौन जला कर गया है चौखट पर, मै अपने घर में कोई और सा चमकता हूँ....!"

तो मेरा उत्तर ये है-
बंद कमरे में शायद सूरज भी न दिखे, चौखट पे रक्खे दिये से घर का पता तो चले।

Saturday, June 06, 2015

एक और सुनिये

कुछ आदतें ख़राब ही अच्छी लगते हैं,
पुराने तो सिर्फ शराब ही अच्छी लगते हैं।
मुहब्बत के बारे में अब क्या कहूँ दोस्तों,
कुछ चेहरे ताहूर-ए-हिजाब ही अच्छे लगते हैं।

Thursday, May 21, 2015

एक और सुनिये

हमें अपनों से नफ़रत है, बेगाने बस बदनाम होते हैं।
लिख लूँ मैं लाख़ शेर फिर भी दर्द मेरे गुमनाम रोते हैं।

Friday, March 20, 2015

एक और शेर का मेरा जवाब

एक कवियत्री हरजिंदर कौर को कुमार विश्वास ने re-tweet किया:
पलकें बंद हुई तो जैसे धरती के उन्माद सो गये,
पलकें अगर उठी तो जैसे बिन बोले संवाद हो गये

और मेरा जवाब उनके लिए:
पलकों को झरोखों सा न इस्तेमाल कीजिए,
दिल की कहानी को जुबां से बयां कीजिए!!


Thursday, March 19, 2015

On Indian Cricket Teams Semi final entry

सात किया है नौ कर दे, अपने कप को लॉक कर दे!!

Monday, February 02, 2015

Standup Comedy

Wednesday, December 03, 2014

इस बार एक कविता

कोई क्लेष नही, सब त्याग किसी वन को जाने में।
कोई क्लेष नहीं, अपने को वानर कहलाने में।
कोई क्लेष नहीं, गर अग्नि परीक्षा हो मेरी,
कोई क्लेष नही मुझको, धरती में समाने में।
पर ये तो बता मुझको प्यारे -
क्या योग्य तू है, इक राम कहलाने में?