Thursday, May 21, 2015

एक और सुनिये

हमें अपनों से नफ़रत है, बेगाने बस बदनाम होते हैं।
लिख लूँ मैं लाख़ शेर फिर भी दर्द मेरे गुमनाम रोते हैं।

Friday, March 20, 2015

एक और शेर का मेरा जवाब

एक कवियत्री हरजिंदर कौर को कुमार विश्वास ने re-tweet किया:
पलकें बंद हुई तो जैसे धरती के उन्माद सो गये,
पलकें अगर उठी तो जैसे बिन बोले संवाद हो गये

और मेरा जवाब उनके लिए:
पलकों को झरोखों सा न इस्तेमाल कीजिए,
दिल की कहानी को जुबां से बयां कीजिए!!


Thursday, March 19, 2015

On Indian Cricket Teams Semi final entry

सात किया है नौ कर दे, अपने कप को लॉक कर दे!!

Monday, February 02, 2015

Standup Comedy

Wednesday, December 03, 2014

इस बार एक कविता

कोई क्लेष नही, सब त्याग किसी वन को जाने में।
कोई क्लेष नहीं, अपने को वानर कहलाने में।
कोई क्लेष नहीं, गर अग्नि परीक्षा हो मेरी,
कोई क्लेष नही मुझको, धरती में समाने में।
पर ये तो बता मुझको प्यारे -
क्या योग्य तू है, इक राम कहलाने में?

Friday, November 28, 2014

Dr Kumar Vishwas ke ek sher ka mera jawab

डॉ कुमार विश्वास ने ट्वीट पर ये शायरी लिखी -
शोहरतें जिनकी वजह से दोस्त दुश्मन हो गए,
सभी यहीं रह जाएंगी मैं साथ क्या ले जाऊंगा?

मेरा जवाब भी सुन लें -
साथ कुछ न जायेगा, शोहरत रहे या न रहे।
कम से कम रहने से उसके इक छाप तो रह जाएगी।


Thursday, November 13, 2014

लीजिये इक और शेर

चाँद को घर पे सजा देंगे इक़रार था जिनका,
ज़मीं से बस अब्र दिखा देना चुभे है जैसे नश्तर।
हम तो अंधेरों के एक बाशिंदे थे,
खुश हो जाते ग़र दिखा देते इक चमकता अख़्तर॥