Thursday, January 04, 2018

एक और सुनो

एक टुकड़ा था रोटी का जो मुँह में जाना था,
गिर गया किसी के हाथ से जो उसको खाना था |
अब झाडू से डरता हूँ, कूड़ा जो दिखता हूँ अब,
क्या याद किसी को होगा मैं गेहूँ का दाना था?

Friday, December 15, 2017

Listen one in English

I am a stone.
I am a stone that wanted to be a knife.
I grounded, grounded hard and harder.
Every time a piece of me broke,
It broke and left some edges.
I can now cut a few things!
But I remain a stone!

Thursday, November 30, 2017

इक और सुन लो

हर राह पर मिलते हैं मुझसे जलने वाले,
इसी तपिश से निखर के आना है,
बहुत हैं आस पास अपने, खंज़र लिए हुए,
इक दौर है शायद, गुज़र के जाना है ||


Thursday, July 20, 2017

एक और सुनो

हो सकता है कि तुम हो सही -

ऐसा नहीं कि मैं ग़लत था,
पर जब हो चीज़ें बिगड़ी बिगड़ी,
तब जो अच्छा है, हो वही -
हो सकता है कि तुम हो सही|

मुझको दिखता है स्वार्थ तेरा,
और अपनी भी मज़बूरी,
सच रहता है हारा हारा,
शायद झूठा है यहीं कहीं -
पर हो सकता है तुम हो सही|

ये सच है की मैं ना जीता,
ये झूठ है कि मैं हारा  हूँ,
ये अंतर्द्वंद का युद्ध वही
मुझे मालूम है तुम नहीं सही-

मुझे मालूम है तुम नहीं सही|

Thursday, June 22, 2017

अज्ञेय को समर्पित मेरी एक कविता

न रह गयी समझ मुझमे, लिखने का न मन ही करता है।
कभी थे यायावर हम भी, अब तो बस कल की ही चिंता है।

जो अग्नि थी भी कभी मुझमे, बुझी सी अब वो रहती है,
जलाया सोच कर ये था, स्याही इसी से बनती है।

किताबें हो गयीं वो कम कसम खाके जिसे सच बोलूँ,
सुनेगा कौन सच मेरा किताबें झूठ की जो खोलूँ?

कवि वो जा चुके हैं, सुन जिन्हें आँखें नम होती थीं,
कलम उठता नहीं मेरा खीझ! अब मेरी ये पीड़ा है।
कभी थे यायावर हम भी, अब तो बस कल की ही चिंता है।

Monday, June 05, 2017

ऐसे ही

मेरे पीछे मेरे अपनों की बात सुना होता,
डाँटने वालों के दिल में मेरे लिए प्यार दिखा होता।
चुभो कर सुई लगे जो बात करते हैं वो,
दिल में उनके कितने खंज़र धंसे, इक बार दिखा होता॥






Tuesday, May 30, 2017

एक और सुनो

देखा है रस्सी को लटकते हुए,
उसकी गाँठों पर पैर रख लोगों को चढ़ते हुए|