Monday, February 06, 2017

मेरा उत्तर






My Response - 
ट्रेनें लिए मुद्दत हुईं,
बसें अब केवल लक्ज़री वाली,
हम हैं नए आम आदमी,
जो कहना हो बोलो बोलो -
उठो वोटरों आँखे खोलो॥ 

Thursday, January 26, 2017

एक ख़ास शेर to salute Nusrat Fateh Ali Khan

क़व्वाली/सूफ़ी के ख़ुदा नुसरत फ़तेह अली खान को मेरा नज़राना:

नूर है तेरा इबादत को सलीम करने में,
राहतें पहुँची तभी जब तेरा नुसरत आया!
सितारे आकर गुज़र जाएंगे हर रात,
तेरे नाम में ही पूरा परवीन पाया!!

Some of excellent stars:
नूर (Light) - Nooran Sisters
सलीम (Safe) - Master Saleem
राहतें (Relief) - Rahat Fateh Ali Khan
परवीन (Cluster of Stars) - Abida Parveen
नुसरत (Aid/Help) - Nusrat Fateh Ali Khan

Monday, December 12, 2016

एक और


चलता रहा सोच के पीछे है कोई खंजर लिए हुए,
मुड़ के देखा होता कम से कम धार तो उसकी।
डरता रहा ता-उम्र संभल के चलूँ ज़रा,
डूब रहा हूँ पैर के नीचे समन्दर लिए हुए।

Saturday, November 12, 2016

सुदामा का काला धन

रुको सुदामा थोड़ा सोचो, कैसे झोपड़ महल हुई?
कैसे आया सोना चांदी कैसे आँगन चहल हुई?
क्या बोलोगे कैसे आया कहाँ से आया किसने दी?
काले ने दी ये कह देना, नहीं चलेगी नहीं चलेगी।

Thursday, October 27, 2016

Another response to Kumar Vishwas's tweet



My Response:
फूल खींच लेते हैं मेरी निगाहें अपनी तरफ,
ये तो चुभते काँटे जो हैं बताते किधर रस्ता है।

इक और सुनो

क्या माला क्या चादर, आँसू मेरी इबादत हैं - तू गिरने मैं सूखने नहीं देता।

Wednesday, October 19, 2016

एक और सुनो

शादी को जबसे सबूत-इ-इश्क़ माना,
चाँद ने भी रोज़े का सबूत माँगा!