Thursday, May 05, 2016

ऐसे ही

अरमानों की थाली पर कुछ स्वप्न सजाए जाते हैं,
कुछ पूरे कुछ आधे होते कुछ रुला रुला कर जाते हैं।
जीवन है - सीखे स्वप्नों से, उपलब्धि से और दण्डो से,
वो भारी भारी पल ही हैं जो जेबों में रह जाते हैं।
बस एक दो पल की हंसी में ही वर्षों के आंसू बह जाते हैं,
कुछ रुला रुला कर जाते हैं।

मैंने ये देखा वो देखा अपनों को बंधक देखा है,
अपने ही तलवारों से खुद को भी कटते देखा है,
क्या पाया क्या खोया है खुद समय में बंधते देखा है,
जर्जर होती कुछ काया को साड़ी में लिपटे देखा है,
क्या सोचूँ क्या कर्म करूँ क्या पढ़ूँ, और मैं क्या समझूँ?
वो अपनों से लगने वाले ही डस कर तुझको जाते हैं,
कुछ रुला रुला कर जाते हैं।




 

Monday, March 28, 2016

सुन लो

हमने छिपाए थे अपने ग़म, तुमने छिपाई थी अपनी ख़ुशी। 
फ़र्क़ इतना झूठ का - आँसुओं में धुली थी मेरी हंसी॥


Wednesday, March 16, 2016

इक और उत्तर

किसी ने लिखा है-
अंधेरे चीर के जुगनू निकालने का हुनर.. बहुत कठिन है मगर तू निकाल लेता है !

तो मेरा भी सुनें -
सुनो ऐ धूप में आँख जलाने वालों  -
इक अँधेरा ही है जो रौशनी छिपाने देता है। 


Wednesday, February 24, 2016

इक और सुनो

दिल का क्या है ये पगला किसी आँख से देखे है किसी कान से सुनता है,
हड्डियों में क़ैद है ऐसा मुझे क्यूँ लगता है?


Friday, February 05, 2016

एक बार फिर मेरा उत्तर

डॉ कुमार विश्वास ने लिखा: 
"उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे ,
वो मेरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे !
मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा उसका ,
ये मुसाफ़िर तो कोई और ठिकाना चाहे !
एक बनफूल था इस शहर में वो भी न रहा ,
कोई अब किस के लिए लौट के आना चाहे !
हम अपने जिस्म से कुछ इस तरह हुए रुखसत ,
साँस को छोड़ दिया जिस तरफ़ जाना चाहे...!"


 तो मेरा जवाब भी सुनो:
सांस है केवल क़रीबी जानें,
जिस्म तो दूर से कहता है की हम ज़िंदा हैं।
भटके हैं तो अपनी मर्ज़ी से,
तेरे दिल के ही बाशिंदा हैं॥


Wednesday, February 03, 2016

अतिथि देवौ भवः

हिन्दू परंपरा में अतिथि को देव या ईश्वर कहा गया है। लेकिन अतिथि कौन है? अतिथि मेहमान नहीं है। अगर आप किसी समारोह के लिए अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों को आमंत्रण दें तो हम यह कहते ज़रूर हैं की ये मेरे अतिथि हैं लेकिन तिथि तो हमने पहले से ही तय कर दी तो वो अ-तिथि कैसे हो सकते हैं? 

अतिथि तो वो हुआ जो तिथि देख के ना आये, खुद ही आ जाए और जो खुद आ जाए वही तो ख़ुदा है।

Tuesday, February 02, 2016

Political perspective of India Australia Cricket series


: India lost the first four most important matches. T-20 is not cricket.
: @narendramodi inspired the last four wins.
: Its an Even win for Australia (4-1) and very Odd win for India (3-0)
: Advani ji ke leadership me hum 8 matches jeetate.
: Next time Australia ko Bihar mein khilayenge aur Tejaswi team ka captain hoga.
: Ye adha adha result Cricket state ke liye bahut kharab hai.
: Let me think.
: My BV was scared to watch the matches on TV.