Monday, February 06, 2017
Monday, December 12, 2016
Saturday, November 12, 2016
सुदामा का काला धन
रुको सुदामा थोड़ा सोचो, कैसे झोपड़ महल हुई?
कैसे आया सोना चांदी कैसे आँगन चहल हुई?
क्या बोलोगे कैसे आया कहाँ से आया किसने दी?
काले ने दी ये कह देना, नहीं चलेगी नहीं चलेगी।
कैसे आया सोना चांदी कैसे आँगन चहल हुई?
क्या बोलोगे कैसे आया कहाँ से आया किसने दी?
काले ने दी ये कह देना, नहीं चलेगी नहीं चलेगी।
Thursday, October 27, 2016
Wednesday, October 19, 2016
Monday, October 03, 2016
मुलाहिज़ा है
डॉ फ़ैयाज़ वजीह ने लिखा -
फ़िदा-ए-मुल्क होना हासिल-ए-क़िस्मत समझते हैं,
वतन पर जान देने ही को हम जन्नत समझते हैं
मैंने बढ़ा दिया -
वतन पर वो नहीं जिसको किसी सरहद से बाँधा हो,
हम अपनी रहनुमाईँ को बेइन्तेहाँ समझते हैं।
फ़िदा-ए-मुल्क होना हासिल-ए-क़िस्मत समझते हैं,
वतन पर जान देने ही को हम जन्नत समझते हैं
मैंने बढ़ा दिया -
वतन पर वो नहीं जिसको किसी सरहद से बाँधा हो,
हम अपनी रहनुमाईँ को बेइन्तेहाँ समझते हैं।
Sunday, September 04, 2016
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