हमारे दिन भी अकेले हैं, बस ख्याली किस्से||
Thursday, May 23, 2019
Thursday, January 31, 2019
Saturday, November 03, 2018
दूर कहीं क्यों जाते हो?
तुम सर्वशक्ति तुम सार्वभौम,
तुम प्राण हृदय, तुम सब कुछ हो
तुम नारायण तुम भोले हो
तुम माँ दुर्गा तुम कण कण हो
पर कहाँ चले जाते हो तुम
जब सबसे अशक्त होते हम हैं
जब मृत्यु निकट होती अपनों की,
तुम विचरण को क्यूँ जाते हो?
गला गला कर व्रत रक्खा है
तुमको पूजा सहज भाव से,
तब छोड़ा जब अधर में हम हों
फिर ईश्वर क्या कहलाते हो?
दूर कहीं क्यों जाते हो?
जिज्जी तुम बहुत याद आती हो बेटा
तुम प्राण हृदय, तुम सब कुछ हो
तुम नारायण तुम भोले हो
तुम माँ दुर्गा तुम कण कण हो
पर कहाँ चले जाते हो तुम
जब सबसे अशक्त होते हम हैं
जब मृत्यु निकट होती अपनों की,
तुम विचरण को क्यूँ जाते हो?
गला गला कर व्रत रक्खा है
तुमको पूजा सहज भाव से,
तब छोड़ा जब अधर में हम हों
फिर ईश्वर क्या कहलाते हो?
दूर कहीं क्यों जाते हो?
जिज्जी तुम बहुत याद आती हो बेटा
Wednesday, June 20, 2018
हम तो केवल बंजारे हैं
कहने को हम बंजारे हैं,
फिर भी ठौर बदलना दुःख होता है -
फिर फिर कर ही राह बनायी,
मुड़ कर फिर भी दुःख होता है |
चलते रहने वालों का तो जहाँ थमे वो घर होता है -
छूटा हाथ चला जो संग में, छोड़ कर उसको दुःख होता है |
हम तो केवल बंजारे हैं, जहाँ थमे वो घर होता है |
फिर भी ठौर बदलना दुःख होता है -
फिर फिर कर ही राह बनायी,
मुड़ कर फिर भी दुःख होता है |
चलते रहने वालों का तो जहाँ थमे वो घर होता है -
छूटा हाथ चला जो संग में, छोड़ कर उसको दुःख होता है |
हम तो केवल बंजारे हैं, जहाँ थमे वो घर होता है |
Monday, April 30, 2018
एक और सुनो
हमने पानी में लहर बनाई पर पत्थर भी फेंका है,
जलती लकड़ी में भी आखिर अपने ठण्ड को सेका है,
कुछ पाने को थोड़ा थोड़ा बहुत बड़ा कुछ छोड़ा है,
मेरी छाया मुझसे लम्बी, अपनी आँखों का धोखा है|
जलती लकड़ी में भी आखिर अपने ठण्ड को सेका है,
कुछ पाने को थोड़ा थोड़ा बहुत बड़ा कुछ छोड़ा है,
मेरी छाया मुझसे लम्बी, अपनी आँखों का धोखा है|
Sunday, April 15, 2018
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