Monday, August 31, 2026

ये भी सुनो

अपने बराबर पतंगों से नज़र मिलाता हुआ,
ऊंचे पतंगों को निहारता हुआ,
नीचे पतंगों से इतराता हुआ,
कटी पतंग सा लहराता हुआ,
ना देखा तो वो ज़मीन, दसियों लंगड़, 
और दूर वो इंसान जिसके हाथों से छूट चुका था मैं| 

 

Sunday, May 24, 2026

एक और सुनो

कभी लात कभी हवालात बदल देते हैं,
मेरी चाल मेरे हालात बदल देते हैं। 
मैं खुद को मुझमें ढूढंता रहता हूँ,
जवाब न मिले तो सवालात बदल लेते हैं।