शोहरतें जिनकी वजह से दोस्त दुश्मन हो गए,
सभी यहीं रह जाएंगी मैं साथ क्या ले जाऊंगा?
मेरा जवाब भी सुन लें -
साथ कुछ न जायेगा, शोहरत रहे या न रहे।
कम से कम रहने से उसके इक छाप तो रह जाएगी।
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Posted by
Ashish
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7:34 PM
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Labels: Indian politics, personal, speech